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उड़ान बुलंद हौसलों की

राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर 14 मेडल जीतने वाली खेल की दुनिया में बहुत कम समय में बड़ा नाम कमाने वाली श्वेता शर्मा के कमर के नीचे का हिस्सा बेजान है।

फिर भी श्वेता शर्मा के बुलंद हौसलों ने अपना लोहा मनवाया हैं।

उन्होंने तीन साल पहले तक कभी खेलने की कोशिश भी नहीं की थी। इसके बादवजूद उन्होंने जिदंगी में कभी हार मानना नहीं सीखा और खुद एक काबिल एथलीट बनाकर ही दम लिया। दिल्ली की रहने वाली श्वेता शर्मा की जिंदगी पिछले तीन साल में काफी बदली है।

श्वेता के सामने सबसे बड़ी चुनौती थी कि उन्हें स्टेडियम लेकर कौन जाएगा। स्टेडियम में जाना मुमकिन नहीं था, इसलिए उन्होंने यूट्यूब पर ही खेल के बारे में जानना शुरू कर दिया।

कुछ महीनों बाद ही उन्होंने लोकल मैदान पर प्रैक्टिस करना शुरू कर दिया औऱ नेशनल की तैयारी की।

और नेशनल में पहला गोल्ड मैडल जीता।

श्वेता शर्मा जी का पहला इंटरनेशनल जो चीन में हुआ था, उसमें उन्होंने ब्रोंज मैडल जीता हैं।

और तीन साल की कड़ी मेहनत के बाद श्वेता शर्मा जी ने 2018 के अक्टूबर में भारत का प्रतिनिधित्व एशियाई खेलों में किया ।

मंजिल उन्ही को मिलती है
जिनके सपनो में जान होती है
पंख से कुछ नहीं होता
हौसलों से उड़ान होती है

हौसले भी किसी हकीम से कम नहीं होते
हर तकलिफ में ताकत की दवा देते हैं
उसूल तो हमारे भी बहुत थे
मगर वो ज़माने को नागवार गुज़रे
मजबूरियाँ होती है, यक़ीन जाता है
बचपन का प्यार अक्सर तजुर्बे दे जाता है
मुसीबत का पहाड़ आख़िर किसी दिन कट ही जाएगा
मुझे सर मार कर तेशे से मर जाना नहीं आता
सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है
देखना है ज़ोर कितना बाज़ू-ए-क़ातिल में है
कल का दिन किसने देखा है आज का दिन भी खोए क्यों,
जिस घड़ियों में हस सकते है उस घडियों में रोए क्यों

श्वेता शर्मा जी की मेहनत और सच्ची लगन से आज उनको सारा देश सलाम करता है और उनकी मेहनत को सराहता है।

श्वेता जी ने अपनी मेहनत से खुद का और अपने परिवार तथा देश का नाम रोशन किया है।

श्वेता शर्मा जी के साथ बात -चीत

अपने बारे में कुछ बताएं।

मेरा नाम श्वेता शर्मा है
मैं पैरालंपिक में गोल्ड मेडलिस्ट हूं।
मैं क्रिएटिविटी एवं आर्ट एंड क्राफ्ट में बहुत रुचि रखती हूँ जब भी कभी खाली टाइम मिलता है तो में यह सब चीजें करना पसंद करती हूं और बच्चों के साथ बैठकर ड्राइंग करना बहुत पसंद है ।

स्पोर्ट्स से जुड़ी हर चीज में डिसिप्लिन रखना बहुत पसंद हैअच्छा-अच्छा खाना खाना घूमना यह सब भी पसंद है.

आपके जीवन की शुरुआत का सफर कैसा रहा ।

जिस समय मैंने अपने खेल जर्नी शुरू कि उस समय मैं कई समस्याओं से जूझ रही थी ।
उससे कुछ टाइम पहले ही में कई जिंदगी की समस्याओं से लड़ रही थी, और मुझे कई अहम फैसले लेने पड़े तब मुझे लगा कि मुझे कुछ करना है तो मैंने खेल में आने का सोचा
पर.. पैसों की परेशानियों से जूझ रही थी।
दो बच्चों की जिम्मेदारी भी थी
और स्टेडियम तक मुझे कौन ले जाए, कौन मेरी ट्रेनिंग कर आए घर से स्टेडियम तक जाना आसान नहीं था ।
कई तरह की समस्याओं का मैंने सामना किया।
मंजिल कोई भी हो रास्ता कठिनाईयों से ही शुरू होता है।

आपको इस सफर में कौनसी सी मुसीबतो और परेशानियों का सामना करना पड़ा।

जब मैंने यह सफर शुरू किया तो उस समय, पैसे , समय और कई समस्याओं का सामना करना पड़ा
बच्चों को छोड़कर जाना ,घर पर ट्रेनिंग करना आसान नहीं था जिम जाना जिम के बाद स्टेडियम के लिए सोचना कि अभी स्टेडियम जाना है
एक घंटा स्टेडियम से घर तक जाने में लगता था एक घंटा ट्रेनिंग करना एक घंटा आना तो बहुत डिफिकल्ट था।
और फिर खुद अपने शरीर को आराम भी देना होता है
और बच्चों के साथ भी समय बिताना होता है।

आपके अनुसार सफलता क्या है।

सफलता तो संघर्ष मांगती है और मेरी नजर में सबसे बड़ी सफलता वह है कि आप किसी भी हालत में अपने आप को हारने मत दो अगर आप खुद को हारने नहीं देंगे तो आप सफलता जरूर पायेंगे।

हारना सबसे बुरी विफलता नहीं है। कोशिश ना करना ही सबसे बड़ी विफलता है। इसीलिए कोशिश और मेहनत हमेशा करनी चाहिए।
सफल होने के लिए, सफलता की इच्छा,असफलता के भय से अधिक होनी चाहिए।

थोड़ी सी और दृढ़ता, थोडा सा और प्रयास, और जो एक निराशाजनक असफलता दिख रही थी वह एक शानदार सफलता में बदल सकती है ।

आप किस चीज़ के लिए उत्साही है।

मैं इस चीज को लेकर काफी उत्साहित होती हूं कि देश के साथ मेरा नाम जुड़ा हो और मुझे देश के साथ साथ अपने परिवार के लिए और अपने बच्चों के लिए एक अच्छा कार्य करना है।
में चाहती हूं कि अपने देश के लिए में एक गोलड मैडल लाऊँ।

ज़िंदगी कि असली उड़ान बाकी है, जिंदगी के कई इम्तेहान अभी बाकी है। अभी तो नापी है मुट्ठी भर ज़मीन हमने, अभी तो सारा आसमान बाकी है।

कोनसी चीज़ ने आपको प्ररेरित किया खेलने के लिये।

अपने पैरा खिलाड़ियों से मैं काफी प्रेरित हूं काफी कुछ उन्हें देखकर और उनके साथ रहकर सीखने को मिलता है
एक अटूट हिम्मत मिलती है
हर एक पैरा खिलाड़ी की जिंदगी मोटिवेशनल है और मैं भी उन्ही से प्रेरित हुन

इस सफर में आपको सबसे ज्यादा किसने सहारा दिया हैं।

मेरे परिवार के सभी जनों ने और मेरे दोस्तों ने इस सफर में मेरा बहुत साथ दिया और मेरे बच्चों ने अपना प्यार दिया।
देश की जनता का प्यार और विश्वास मेरे लिए अहम है।

आपके सफर का सबसे अनमोल समय कोनसा हैं।

मेरे लिए वह बहुत अनमोल समय था जब देश के साथ मेरा नाम जोड़ा और 2017 में चीन में पहला इंटरनेशनल इवेंट था,
जहां पर मेरा नाम श्वेता शर्मा फ्रॉम इंडिया अनाउंस हुआ वह बहुत प्राउड मूवमेंट था मेरे लिए।

मैं दीपा मलिक जो की रियो 2016 में मेडलिस्ट रह चुकी है उनसे काफी इंस्पायर होती हूं ।

उन्होंने मेरा इस सफर में बहुत साथ दिया।

और अपनी बैरक के कई खिलाड़ियों से मैं बहुत इंस्पायर हूं उनकी जिंदगी के उतार-चढ़ाव सुनकर मुझे और हिम्मत मिलती है।

मैं तहे दिल से शुक्रिया करती हूं पैरालंपिक कमिटी का कि उन्होंने हमारा हौसला बढ़ाया और हमें यहां तक पहुंचने का मौका दिया कि हम देश का नाम रोशन कर सकें सोशल मीडिया ने भी बहुत साथ दिया है बहुत प्रोत्साहित किया है आगे बढ़ने में ।

खुद को कमजोर समझने वाले लोगो के लिए कोइ संदेश।

कमजोर हमें कभी खुद को नहीं अपनी परेशानियों को समझना चाहिए कि जिन्हें हम बहुत आसानी से तोड़ सकते हैं
वह बहुत कमजोर है ऐसी सोच बनाने से हम मेहनत कर सकते हैं और जीवन में आगे बढ़ सकते हैं और पहले हमें खुद का साथ देना चाहिए तभी पूरी कायनात मिलकर हमारा साथ देगी।

समाज और लड़कियों के लिए क्या संदेश देना चाहेंगी आप ।

लड़कियां=हौसला

लड़कियां आज की डेट में क्या नहीं कर सकती सब चीजें हो रही है लड़कियां देश का और परिवार का नाम रोशन कर रही है लड़कियों को किसी भी हालत में खुद को कभी कमजोर नहीं समझना चाहिए अगर मैं शरीर की समस्याओं के साथ दो बच्चों की जिम्मेदारी होने के साथ-साथ पैसे की परेशानियों और बहुत से तकलीफो के साथ
अपने मां बाप के साथ रह रही हूं अपने दो बच्चों का पालन पोषण कर रही हूं और तब भी मैं यहां तक पहुंच पाई अपने देश के साथ जुड़ कर अपने देश का नाम रोशन कर पाई तो लकड़कियाँ और बेटियां क्या नही कर सकती है ।
और समाज के लोगो से में कहना चाहती हूं आप जरूरतमंद लोगों की सहायता करें ।

उन लोगो का साथ दो उनका हौसला बढाओ और उनके साथ अच्छा व्यवहार करो।

लड़कियां दो घरों को रोशन करती है ।

लड़कियों की इज़्ज़त और उनका सम्मान करना चाहिए।

जिंदगी की असली उड़ान अभी बाकी है; जिंदगी के कई इम्तिहान अभी बाकी हैं; अभी तो नापी है मुटठी भर ज़मीन आपने; आगे अभी सारा आसमान बाकी है।

विशाल अहलावत

श्वेता शर्मा

By VISHAL AHLAWAT

THANK YOU GOD FOR GIVING ME PARENTS AND THANK YOU FOR GIVING ME BIRTH. I AM A AUTHOR TODAY ONLY BECAUSE OF GOD, PARENTS AND PEOPLE WHO BLESSED ME AND SUPPORT ME. THANK YOU EVERYONE. STAY BLESSED STAY HAPPY. #BETI BACHAO BETI PADHAO #VISHAL AHLAWAT

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